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सत्येन्द्र कात्यायन


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राजनीति या भ्रष्ट नीति……….

Posted On: 6 Aug, 2013  
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भगवान तूने जुल्म का सैलाब बनाया

Posted On: 31 Mar, 2013  
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कविता में

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किसान, गरीबी और मंहगाई ……….

Posted On: 1 Mar, 2013  
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कविता में

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हम और हमारा राजतंत्र

Posted On: 13 Feb, 2013  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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तमाशा…..

Posted On: 4 Feb, 2013  
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हास्य व्यंग में

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बोस से लें सीख

Posted On: 23 Jan, 2013  
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उलझन

Posted On: 13 Jan, 2013  
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ईंट का जवाब पत्थर……………..

Posted On: 13 Jan, 2013  
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मस्तिष्क का खेल – विचारों का खेल

Posted On: 25 Dec, 2012  
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औरत और समाज………….

Posted On: 21 Dec, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

से भारत का बडप्पन नहीं कहा जा सकता , ये मेरे मुल्क के प्रशासकों, शासकों की सबसे बडी बेवकूफी है। अब हमें इस तरह चुप होकर नहीं बैठना चाहिए। भारत के पावन सिंहासन को कलंकित करती ये सरकार देश को लज्जित करने में अपना जितना हो सका योगदान दे रही है। ये बेहद दुर्भाग्य पूर्ण ही नहीं आत्मा को कचोटने वाला है कि हम पाकिस्तान के हाथों,…. एक अदने से मुल्क के हाथों शिकस्त खाते रहे है और वो हम पर हावी होता जा रहा है । तो क्या समझा जाऐ भारत अपनी प्राचीन परम्परा का निर्वाह नहीं कर पा रहा है! हमारी तोपो को बारुद खत्म है या बंदूकों में जंग लगा है। हम क्यों इतने भीरु हुए जा रहें है कि कोई हमारे गालों पर तमाचे लगाये जा रहा है और हम बिना रोये बिना चिल्लाये बिना उसका प्रतिकार किये सह रहें है। हम इस तरह खुद को महात्मा बना रहें हैं! महात्मा!! ……यदि आज विवेकानंद होते , भगत होते, सरदार पटेल होते, चंद्रशेखर होते तो भारत की इस दशा पर रो पडते ……फफक पडते ……….हमे गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले ंदेश के असंख्य कर्णधार इस परिस्थिति में क्या चुप रहते ? सार्थक , सटीक और सच !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat




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